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आज़ाद सेवा संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा: ‘शोषण से शिक्षा का अधिकार और बाल मनोविज्ञान का हनन’

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बाल क्रूरता एवं यौन शोषण: आज़ाद सेवा संघ ने मुख्यमंत्री से शून्य सहनशीलता नीति लागू करने की माँग की

आकाश सोनकर अंबिकापुर: आज़ाद सेवा संघ छत्तीसगढ़ ने छत्तीसगढ़ के शिक्षण संस्थानों में बच्चों के प्रति हो रहे अमानवीय शारीरिक दंड, क्रूरता और गंभीर यौन शोषण की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। संघ ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि ऐसी घटनाएँ न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं और उनके मन में स्कूल के प्रति एक गहरा डर पैदा कर रही हैं।

आजाद सेवा संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव, श्री रचित मिश्रा, ने माननीय मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में कहा है कि, “इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि स्कूल अब ज्ञान के मंदिर नहीं, बल्कि बाल मन को आघात पहुँचाने वाले स्थान बन रहे हैं। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 17 और POCSO अधिनियम के मूल उद्देश्यों को विफल करती है।”

श्री मिश्रा ने ज़ोर देकर कहा कि लगातार होने वाली हिंसा और उत्पीड़न से बच्चे गंभीर मानसिक आघात से गुज़र रहे हैं, जिसका उनके शैक्षिक प्रदर्शन और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

“जब एक मासूम को स्कूल में रस्सी से बांधकर लटकाया जाता है, या प्राचार्य पर यौन शोषण का आरोप लगने के बाद छात्रा आत्महत्या कर लेती है, तो लाखों अन्य छात्रों के मन में स्कूल जाने को लेकर गहरा डर (Phobia) बैठ जाता है।

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